राह में तो काटें आएगे ही,
तु बस चलता जा मानव,
पांव के रक्त से ना घबराना तु,
रक्त ही तो ओरो को राह दिखाएंगे,
राह में तो काटें आएगे ही,
तु बस चलता जा मानव।
Chintan
गुरुवार, 3 अगस्त 2017
Short poam let's see.
सोमवार, 25 जुलाई 2016
Group
When you think that this group of people is much better than yours that means it is the time to make your group better. - Ravishankar
शुक्रवार, 22 जुलाई 2016
Frustration vs Rest
When you are very frustrated that means you have to take rest instead of thinking that you have nothing. - Ravishankar
रविवार, 5 जून 2016
Dedicated to KOTA students
दीवार पर कुछ लिख गया वो;
अपनी भूल बयाँ कर गया वो;
सपनें संजोए आया था वह इस गर्म जमीं पर;
मिली थी आजादी उसे इस तप्त जमीं पर;
कागज़ पर थी उस कलम की जगह;
पश्चाताप थी उन शब्दों की वजह;
शायद इसलिए;
दीवार पर कुछ लिख गया वो;
अपनी भूल बयाँ कर गया वो;
शुक्रवार, 22 जनवरी 2016
बड़ा (maturity)
व्यक्ति दो तरीके से बड़ा होता है, एक उम्र से दुसरा अनुभव से। फर्क सिर्फ इतना है कि उम्र के साथ शरीर बड़ा होता है और अनुभव से सोच।
रविवार, 17 जनवरी 2016
सफलता की सोच
शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015
अरमान :
अरमान
अरमान जगे थे आज से साल भर पहले,
ख्वाहिश-ए-दिल थी पूरा करने की उसे |
याद आते है हर पल हर वक्त हर वो लम्हा,चाह कर भी ना भूल पाता हुँ वो सपना जिसके कारण,
अरमान जगे थे आज से साल भर पहले |
दिल को रोक रखा था ना जाउँगा उस राह में,
मालूम था मुझे एक दिन जरूर गड़ जाएंगे काटे पाँव मे,
फिर भी भूल गया उन काटों को और खो गया उस खुशबु में,
जिसके कारण,
अरमान जगे थे आज से साल भर पहले |
नींद खुलती थी उन यादों की मुस्कान में और रात होती थी उस सपने की आगोश में,
कौन जानता है मुस्कान युँ थम जाएगा और सपना युँ टूट जाएगा |
क्योंकि आज भी अधूरे है वो जो,
अरमान जगे थे आज से साल भर पहले |
सोचता हुँ जिद रखु या छोड़ दुँ उस अरमान को,
समेट लु उस अरमान को और नई राह में आगे बढ़ु |
पर फिर भी डर लगता है कि फिर ना कहुँ मैं कि,
अरमान जगे थे आज से साल भर पहले |
रविशंकर जंघेल